Monday, August 03, 2015

एक अपील मुसलमानो से


प्यारे मुसलमान भाई और बेह्नो।


में कोई राहुल गांधी की तरह राज नेता या अनिल अंबानी की तरह उधोगपति या मोदी की तरह आतंकवादी नहीं हूँ जिसको अपने हर काम के पीछे अपनी राजनीतिक, उधोगिक या संघटन की भलाई नज़र आय।    में एक लेखक और पत्रकार हूँ और कोई भी लेख में पैसा या शोहरत कमाने के लिए नहीं लिखता हू बल्कि एक मुसलमान का दर्द जो दूसरे मुसलमान को होता हे मेरे लेख के जरिया बहार आता हे.  मेरे लेख एक और बटवारा ………।  जिसमे मेने लिखा हे की किस तरह सरकार और अन्याय  बटवारे की सोच को जन्म देते हे.  सोशल मीडिया में  बोहोत बावेला मचा मेरे पास बोहोत धमकी भरे फोन आय, और कुछ लोगो ने मेरे ट्वीटस को बोहोत से मीडिया हाउस में दे कर आम कर दिया। खेर मुझे किसी भी तरह का न खौफ हे और न मेरे ट्वीट्स के ऊपर कुछ ग़म.  मेने जो कहा सही कहा और अभी तक में मेरे ट्वीट्स जो मेने इस्लामिक स्टेट के फेव में किया था और बटवारा वाले लेख पे क़ायम हू.  जो सैद्धांतिक हे न की मेरे दिमाग की खुराफात अगर अन्याय होगा तो अलगाओवाद पैदा होगा और अलगाओवाद जन्म देगा बटवारे को. 


बोहोत से पाठक गण मेरे को गद्दार कहते हे तो में उन सभी को बतलाना चाहता हूँ की असली गद्दार कौन हे भारत की न्याय वयवस्था, सरकार या राष्ट्रपति जो अपने ही न्यायलय के दोस्त याकूब को क़त्ल कर देते हे. जिसने की न्याय की मदद की और सारे सबूत वीडियो कोर्ट में सोपे, रॉ और भारतीय सुरेखा एजेंसिओं के इस आश्वासन पे की उनके साथ न्याय होगा और भारत सरकार उनके लिए मर्सी की अपील करेगी।  लेकिन सारे सबूत मिल जाने के बाद याकूब के उपर ही चार्ज शीट दाखिल कर दी गई और उनको क़त्ल कर दिया गया. फिर अगर भारत सरकार इस्लामिक स्टेट को अमानवता और क्रूर कहती हे तो गलत करती हे.  क्योकि इस्लामिक स्टेट के जिहादी गद्दार नहीं हे वो कभी भी अपने दोस्त को या जिस इंसान ने उनकी मदद की हे नहीं मारते।  जैसा की भारत की सरकार ने किया याकूब जिसने न्यायलय की मदद (न्याय का दोस्त) की उसको ही क़त्ल कर दिया।  याकूब का क़त्ल बिलकुल राजनीती और ज़ात पात से पेरित था अगर याकूब यश या यादव होता तो उसको हरगिज़ क़त्ल नहीं किया जाता।


याकूब के क़त्ल के बाद एक बात साफ़ हो गई की कभी भी भारत सरकार या न्यायालय की मदद न की जाय, और में सभी मुसलमानो से अपील करूँगा की कभी भी किसी भी भारतीय, सरकारी नौकर या पुलिस की मीठी और चिकनी चुपड़ी बातो में न आय.  अगर कोई भी वास्तु उनको अनजान या लावारिस पड़ी हुई नज़र आय य कोई व्यक्ति संशय प्रस्त स्थिति में घूमता नज़र आय तो हरगिज़ पुलिस या सुरक्षा एजेंसी को इन्फॉर्म न करे.  दूसरी बात पुलिस कभी भी आपकी सोसाइटी में अगर दुसरे मुसलमान के बारे में पता करने आय तो हरगिज़ उसके बारे में न बतलाय। भले ही वो मुसलमान आपके घर के सामने ही कियो न रहता हो.   क़ानून और सरकार ने मुसलमान  होने के नाते याकूब को क़त्ल किया हे तो अब हम भी मुसलमान की कोई भी बात किसी पुलिस वाले को या सुरक्षा एजेंसी को नहीं बतलायगे. 

 
मेरी य बाते हर उस भारतीय को बुरी लगेगी जो भारत से प्यार करता हे,  हो सकता हे कुछ संघी मानसिकता वाले या मुसलमान सरकारी नौकर भी इस कड़ी में जुड़ जाय और मेरे को बुरा भला कहने लगे. लेकिन मेरी य अपील हर उस मुसलमान से हे जो कहता हे में पहले मुसलमान हूँ फिर भारतीय।


दूसरी बात सन १९९२ तक में भी पूरी तरह भारत का सम्मान और भारत के लिए अपनी जान क़ुर्बान करने वाला नौजवान था.  बाबरी मस्जिद शहीद करने के बाद मेरे विश्वास को थोड़ी ठेस लगी लेकिन अभी तक में भारत की न्याय प्रणाली पे यकीन रखता था. जो २००२ के बाद और फिर याकूब के क़त्ल के बाद पूरी तरह भस्म हो गया. मेने देखा हे बाबरी मस्जिद शहीद होने के बाद और दंगा फसाद खत्म होने के बाद वो मंज़र के किस तरह पुलिस मुसलमानो के घरो में घूस कर नौजवान लड़को को गिरफ्तार कर रही थी.  यहाँ तक के ३ साल के मासूम बच्चो को भी गिरफ्तार किया जा रहा था. में उस वक़्त अपनी बेचलर की पढ़ाई कर रहा था और साथ ही सिविल सर्विसेज के लिए तैयारी भी कर रहा था और वालिद साहब पहले दर्जे के अफसर थे तो पुलिस से पहचान थी.  मेने पुछा इन मासूमो का क्या क़सूर हे तो पुलिस ने जवाब दिया इसराइल में भी ३ साल के ऊपर के बच्चे को गिरफ्तार करते हे. उसपे मेने कहा य भारत हे और सविधान के किसी भी कलम में मासूम को संगीन गुनाह में गिरफ्तार करने का प्रावधान नहीं हे.  खेर पुलिस ने मासूम बच्चो को तो छोड़ दिया लेकिन नौजवानो को ले गई और किसी को २ महीनो के बाद किसी को ३ महीनो के बाद छोड़ दिया।  जो बोहोत ही गरीब थे और उनके पीछे कोई बेकिंग भी नहीं था उनको पुलिस स्टेशन में प्रताड़ित कर के शहीद कर दिया जिसकी न कोई रिपोर्ट और न कोई गवाहि.  लाश को उनके परिवार वालो को सौप दिया गया य कह कर की तुम्हारा परिजन पुलिस से भागने की कोशिस कर रहा था और जवाबी कारवाही में मारा गाया.  खबरों का बवंडर आया और चला गया फिर वही पुलिस वाले पदोन्नति किये जाते हे और नेताजी १५ अगस्त को उनके लिए सम्मान भरे भाषण देते हे.



सारा फ़साना बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद शुरू हुआ और १९९३ से लेकर २००२ तक के सारे वाक़ियात कही न कही बाबरी मस्जिद से जुड़े हुए होगे.  और अगर भारत का एक और बटवारा होता हे तो वो भी बाबरी मस्जिद की वजह से ही होगा.  दिल्ली में बैठे आतंकी सरकार य न समझ ले की उन्होंने याकूब का क़त्ल कर के जंग जीत ली हे नहीं बिलकुल नहीं असली लड़ाई तो अब शुरू होगी.   मेने बोहोत सोच समझ के इस्लामिक स्टेट में जाने का फैसला किया हे.   


चाहे तो नई मुंबई या मुंबई पुलिस मेरे को गिरफ्तार कर सकती हे जैसा की एक सज्जन ने मेरे खिलाफ शिकायत दर्ज की हे और गिरफ्तार करने की मांग की हे.  पुलिस जिसके पास मेरा पूरा पता और चाल चलन का रिकॉर्ड हे.  केंद्रीय सरकार के हर नुमाइंदे राष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, गृह मंत्री, क़ानून मंत्री, शिक्षा मंत्री, सांसद कार्य मंत्री विदेश मंत्री फिर उच्चतम न्यायलय की चीफ जस्टिस महाराष्ट्र के उच्च न्यायलय,  राज्यपाल, मुख्य मंत्री, ग्रह मंत्री, के पास मेरे पत्र  जाते रहते थे य बात अलग हे की आतंकवादीओ के सांसद पे क़ब्ज़ा करने के बाद मेरे को भारत की न्याय प्रणाली और सरकार पे भरोसा नहीं रहा तो पत्र लिखना बंद कर दिया.  



इतना सख्त क़दम सिर्फ दो लोग उठा सकते हे एक वो जो पैसे के  लिए काम कर रहा हो और दूसरा वो जो मुसलमान के लिए काम कर रहा हो.  पहले सवाल का जवाब हे न तो में भारत य किसी अंतराष्ट्रीय एजेंसी से कोई भी मदद लेता हूँ और न ही मुझे पैसे का कोई लालच हे।  दूसरी बात में मुसलमानो के हक़ के लिए लड़ाई कर रहा हूँ मेरे जेब का पैसा लगा कर काम करता हूँ.  मेने पत्रकार की डिग्री उम्र के ४७ साल में इलिलिये ली क्योकि भारत के पत्रकार और मीडिया हाउस एक तरफ़ा बात कहते हे और जो सरकारी बोली होती हे उस ही को बजाते हे. सही बात को दबा दिया जाता हे जो आम तौर पर मुसलमान की होती हे.  तो में मुसलमानो की आवाज़ बनूगा और सही बात समाज के सामने लाने की कोशिश करूगा.


में कितना सही हूँ और कितन गलत वो आपलोगो का लाइक  और व्यू ही सिद्ध कर देगा जिस तरह से शहीद याकूब मेमन के जनाज़े की भीड़ ने सिद्ध कर दिया के मुसलमान उनके साथ हे.  दूसरी तरफ भारत सरकार का एक नुमाइंदे का इंतेक़ाल हुआ जिसके जनाज़े में सरकारी नुमाइंदे तक नहीं पहुँचे और बोहोत कम भीड़ जुट पाई.


आपका खादिम,

 ज़ुबेर एहमद खान  

 

Sunday, August 02, 2015

How long you blame to Pak.


Terrorists strike on Dinanagar of Gurudaspur Punjab on Monday 27th July 2015.  Indian Government as usual without completing concrete enquiry, simply blamed to Pakistan behind the attack.  In fact the act of terrorist attack on Punjab soil nearly after a decade is the act of Hindu Terrorists in collusion with Government of India. 


I cannot understand any concrete reason and benefit for Pakistan and any of the Jihaidi organizations behind the attack on Punjab and killing Sikh police and people.   But there are several benefits for India to get after the attack on its own soil and killing its own citizens.  Indian Terrorist Modi got severe opposition and protest from Sikh community on his visit to America in the year 2014 and in 2015 at Canada, holding him responsible for the Genocide and State Sponsored Terrorism against innocent Muslims in Satan Area Terrorist Land Guj 2002. Sikh community is looking sympathetic towards Muslims while they hosted Iftar at Canada, Dubai and given place in the Gurudawara Saheb for Namazis to offer Namaz.  Indian Government and Hindu Terrorists wanted to sabotage the relations and sweetness which developed between Sikhs and Muslims and increased the enmity between the two community after the attack.  


Terrorist Modi is well forward in developing hate, abhorrence between the two communities.  That is the only reason immediately after come to power in the year 2014 there were communal riots between Sikh and Muslims in Saharanpu UP in July 2014 killed three persons and another more than 100 injured.  In Hyderabad May 2014 Modi and Hindu Terrorists tried to divide the two community and topple the Assauddin Owasee to polarize the Hindu vote and divide the Minorities vote.  Hindu terrorists from Ahmadabad and other places played the dirty game to burn the religious flag of Sikh community blamed it on Muslims with exited and highly communal message flare up, in favour of Sikh community and against Muslims.   Sikh community come under the trap of  Terrorists come out with swords, lathis and other weapons and attacked on Muslims.  Result of that violence cost to 3 human lives but thanks to God Modi could not get the benefit of the situation in the election and Assauddin Owasee again won the battle. 


Secondly, Modi wanted to divert the mindset of the people from the core issue of development and avoids to answer the series of questions from opposition to be asked in the Parliament, so terrorists attack was carry out, just to divert the attention of the people and concentrate and speak on terrorism instead of his government weak points. 


Thirdly, terrorists and Modi did not want to establish peace with Pakistan and they wanted to sabotage the Russia talks with Pakistan counterpart Nawaz Sharief.  Hindu terrorists attacked on Punjab after that India would have ample reason to stop the peace process blaming on Pak for harboring terrorists on Indian Soil.  


It is the habit of the people of India and Government to kill a person while showing extra love, affection, promises and friendship.  If Indian Government can kill to its own friend of Court (amicus curry) Yakub Memon who helped to the Security agencies and who helped to the court given all the evidence against Jihaids.  But after completion of the enquiry Court framed the charges against its own friend who helped to the Court and kill him in cold blooded, so we can expect any dirty game from Indian side.  It is the habit of Indian Government one hand they extend for friendship and from other hand they insert the knife in the back of friend.  


Attack on Gurudaspur moreover looking the act of India and its terrorists to get maximum benefit of the situation, rather the act of Pakistan or any of the Jihadi module without any benefit.


Zuber Ahmed Khan
Journalist.