Monday, December 15, 2014

Black truth of Indian Jail.

एक मित्र दुवारा भेजा खत, 


जेल में मुसलमानों के साथ वहशियाना सुलूक:-अयोध्या हमले के इल्ज़ाम में नैनी सेंट्रल जेल में कैद सहारनपुर के डा० इरफ़ान ने राष्ट्रपति के नाम ख़त लिखा। इस ख़त में उन्होंने अपने ऊपर पुलिस के ज़रिया ढाए जाने वाले ज़ुल्म की जो दास्तान लिखी है वह अबुगरीब और गुअतनामो के ज़ुल्म को फीका कर देने वाली है। जिससे S.T.F. की मानसिकता का आसानी से अंदाज़ा हो जाता है।


याद रहे कि डा०इरफ़ान अभी भी मुल्ज़िम हैं मुजरिम नहीं लेकिन एक मुल्ज़िम को पहले रोज़ से गिरफ़्तार करने के बाद उसके साथ जैसा सुलूक किया जा रहा है वह पूरी कौम के लिए एक सोचने और फ़िक्र करने की बात है। डा० इरफ़ान लिखते हैं-


"कोई त्यागी नाम का पुलिस वाला था जिसने गिरफ्तारी के फ़ौरन बाद ही (लॉकअप में लाने के बाद) मेरे मुंह पर थूकना शुरू कर दिया, नंगा करके...... बाल उखाड़ा गया, वह मुझे उल्टा लटका कर नाक में पानी डालते थे, मोमबत्ती को तिरछा करके पिघला हुआ मोम मेरे गुप्तांगो पर गिराते थे। मैं चीखता था, तड़पता था, वह लोग कहकहे लगाते थे...वह मेरे मुंह पर पेशाब करते थे और उसको पीने के लिए मजबूर करते थे अगर थूक दूँ तो मुझे बुरी तरह पीटते थे,.... त्यागी कहता था कि देख S.T.F. के कमांडो क्या करते हैं, और अभी आगे देखता जा...त्यागी लम्बा हाथ, मुंह पर चेचक के दाग थे, बाकी जो 4-5 पहलवान टाइप के लड़के थे वह एक्सरसाइज करके सुबह हनुमान चालीसा और दुर्गा चालीसा पढ़ते थे, उनके पास राइफल थी..दिन भर हज़ार बार मुझे माँ बहन की गाली दी जाती थी, मेरे गंजे सिर पर चप्पलो से पीटा जाता, 25 चप्पल गिन कर मारते फिर गिनती भूल जाने का बहाना करके फिर मारते।

 
सहारनपुर से जीप के द्वारा फैज़ाबाद के लिए चले,रास्ते में दो राते थाने पर गुज़ारी,दोनों थानों में मुझे रात भर नंगा करके रखा गया। स्थानीय पुलिस वाले मेरे पास सिर्फ थूकने के लिए आते थे,क्या सिपाही क्या दरोगा,क्या पुलिस ऑफिसर..फिर मुझे फैज़ाबाद अदालत में पेश किया गया,जहां मीडिया वालो ने वकीलों के साथ मिल कर मेरी ज़बरदस्त पिटाई की। फैज़ाबाद जेल पंहुचा वहाँ कैद तन्हाई में डाल दिया गया। छोटी सी कोठरी..अन्दर ही टॉयलेट,एक घड़ा पानी,बदबू से दम घुटता था। सांस लेना मुश्किल,उसी में खाना, वकीलों ने केस लड़ने से इनकार कर दिया। जो भी वकील मेरे घर वाले भेजते थे उन्हें फैजाबाद के वकील जज के सामने ही कोर्ट रूम में दौड़ा दौड़ा कर पीटते थे।
 
रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा उर्दू 5 जुलाई 2013)
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एडमिन नसीम

Sunday, December 14, 2014

Can we term them Human? Or animals. Part-II



Cont. from part 1

American soldiers crossed all the barriers of humanity.  In fact 2003 was not the war but it was the invasion and annoyance of Bush and uncompleted work of Bush senior.  Modi in America sold himself and bow down in front of Obama administration, criticized to the Caliphate Army but ignore the past history of American Army and their atrocities on Iraqi soldiers.  Indian paid Media have not brought such types of pictures and clipping in front of public, as they are bringing the picture of Caliphate and projecting them in wrong context that Caliphate Army is cruel. 


An Iraqi detainee appears to be restrained after havign suffered injuries to both legs at Abu Ghraib.
It is unclear whether his injuries were from dog bites.
 
A baton-wielding US soldier, appears to be ordering a naked detainee
covered in a "brown substance" to walk a straight line with his ankles handcuffed
A US Soldier in a flak jacket appears to be using both hands
to restrain a dog facing an Iraqi detainee in the Abu Ghraib prison.

                                               In what appears to be a hallway, a hooded detainee,
  seems to be handcuffed in an awkward position atop two boxes.
The frame seems to show the prisoner's ankle cuffed to the door handle behind him


An unidentified soldier appears to be kneeling on naked detainees
in a photo from the Abu Ghraib prison in Iraq.


Along a prison walkway, a hooded detainee seems to have
collapsed with his wrists handcuffed to the railings.
 

An Iraqi prisoner and American military dog handlers. Other photographs show the Iraqi on the ground, bleeding.

 

Is this humanity Modi you cried at America and called the treatment of Caliphate as most inhuman.  Are you human to overlook these all incidents? Indian media ABP anchor Nikhil Adwani instead of appreciate the act of Caliphate Army of being behead Americans in Saffron costumes, criticized them.  Whatever they have received with Americans if same have not returned to America.



Zuber Ahmed Khan


Cont... part 3