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Mr. Zuber Ahmed Khan is a Muslim by birth, has got strong and stiff views on Islam. Mr. Zuber believes in Humanity when Islam is in trouble. He believes any Muslim Men or Women should die for Islam when required. Mr. Zuber Ahmed Khan completed his Post Graduate in Public Administration in the year 1995 and stands in first class. He completed his Diploma in Computer Hardware and Software Engineering from Bombay. Completed Masters Degree in Journalism & Mass Communication and stand in first Class.

Thursday, 31 August 2017

सामाजिक बहिष्कार पे हो फ़तवा

हाल ही में तीन तलाक़ पे उच्चतम न्यायलय का फैसला आया और उसके साथ ही तमाम हिन्दू आतंकवादीओ,  सरकारी नुमाइंदो, प्रधान सेवक, आतंकी सरगना अमित, भगवा मिडिया आजतक, इंडिया न्यूज़, की गुलाम महिला पत्रकार तथा ज़ी न्यूज़ के गुलाम पत्रकार और गुलाम संस्थाओ ने राहत की सास ली और इस फैसले का खैरमकदम किया.  ऐसा करने के पीछे इन सभी की मानसिकता तलाक़ ख़त्म होने पे ख़ुशी का इज़हार करना नहीं था बल्कि इस फैसले को ये अनपढ़ जाहिल कॉमन सिविल कोड की और एक सकारात्मक कदम की हैसियत से देख रहे थे.  जब तक इस फैसले का ऑपरेशन आज़ाद पत्रकारों ने और दानिशमंद मुस्लिम राजनेताओ ने नहीं कर दिया और भगवा गुलाम पत्रकारों को इस फैसले का सही मतलब नहीं समझा दिया.


फिर खबरे आना शुरू हुई के जो महिलाये सुप्रीम कोर्ट तक गई थी उनका सामाजिक बहिष्कार शुरू हो गया हे तो इस फैसले का में पत्रकार जुबेर एहमद खान खैरमकदम करता हूँ. अब इन जैसी महिलाओ के ऊपर एक फतवा ज़रूरी है जो इस्लाम के कानून के खिलाफ हिन्दू राष्ट्र में हिन्दू सरकार से तब्दीली की बात करती हे.  इनके बच्चो, भाई बहनो  को कोई भी मुस्लिम अपनी लड़की नहीं दे और इनके माता पिता तथा इनके तमाम खानदान से कोई भी लड़की दे ले. फिर इनके जनाज़े की नमाज़ कोई भी मुस्लिम मौलाना नहीं पढाये और इनको कबरस्तान में जगह दी जाए.


जो एक ख़ास पत्रकार मडली इन महिलाओ के समर्थन में खड़ी हे उन सभी से निवेदन हे अपनी टी.आर.पि. बढ़ाने के लिए और मसला इस्लाम और मुस्लिम महिलाओ से जुड़ा हे तो ज़्यादा ही भावुक हो कर खबरे दिखाने के लिए जो उत्सुक है वो सभी अब अपनी सेलरी का एक चौथाई हिस्सा इन महिलाओ के नाम करे. और अगर इन पत्रकारों ख़ास कर के आज तक इंडिया न्यूज़ की वो महिला पत्रकारों से में पूछना चाहता हूँ क्या वो अपनी सेलरी का एक चौथाई हिस्सा इन महिलाओ के नाम करेगी क्या वो इन महिलाओ के बच्चो को अच्छे स्कूल में दाखाला देने की मुहिम में शामिल होगी. क्या अगर इन महिलाओ का सोशल बहिष्कार होता हे तो इन महिलाओ के लड़को से अपनी लड़कीओ की शादी करेगी. अगर ऐसा कुछ करने की हिम्मत नहीं हे उनमे तो तीन तलाक हुई महिलाओ के हक़ की बात किस हैसियत से करती है क्या ये हमदर्दी किसी के मज़हबी मामलो में दखल देने की नियत से और हिन्दू क़ानून लागु करने की एक मुहिम तो नहीं.  क्या ये हमदर्दी सिर्फ दिखावा तो नहीं और ख़ास कर के क्योके ये मसला मुसलमानो से जुड़ा है तो इसमें ज़्यादा ही भावुकता दिखाई जा रही हे. क्या य टी.आर.पि. बढ़ाने का नया शगूफा नहीं हे. अगर आप इन महिलाओ की सच्ची हमदर्द हे और आपको ख़ुशी हे उच्चतम न्यायलय के फैसले से तो ठीक है मदद करिये इन महिलाओ की, माली इमदाद करिये इनके बच्चो को अच्छे स्कूल में दखाला दिलवाइये. इनको रोज़गार दीजिये क्या आपमें इतनी हिम्मत हे. ट्रिपल तलाक़ पे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ऊपर ख़ुशी ज़ाहिर करना बड़ी बात नहीं वो तो हर भगवा धारी कर रहा हे जिसका मकसद इस्लाम और शरीयत को तबाह करना था लेकिन असली ख़ुशी तो तब मानी जायेगी के आप इन महिलाओ के आगे के मसले हल करेंगे.


में बहैसियत एक पत्रकार ‘आज तक’ और ‘इण्डिया न्यूज़’ की महिला पत्रकारों से ‘ज़ी न्यूज़’ के और उन तमाम पत्रकारों से ज़रूर एक सवाल करना चाहूँगा जो मुस्लिम महिलाओ को इस फैसले के बाद आज़ाद करार दे रहे हे क्या ये पत्रकार खुद आज़ाद हे. क्या इन पत्रकारों को आज़ाद सोच रखने और कहने की हिम्मत है. क्या इन पत्रकारों को मोदी, बीजेपी या सरकार के खिलाफ न्यूज़ एयर करने की हिम्मत है. क्या इन पत्रकारों को सच्ची बात कहने और पब्लिश करने की इजाज़त हे और ख़ास कर के वो न्यूज़ जो पाक के हक़ में सच्ची हो और भारत को मोदी सरकार की मक्कारी और आतंकवाद पे दोगली निति को बेनकाब करती हो जो सच्चाई पे आधारित हे.  क्या इन भगवा पत्रकारों में इतनी हिम्मत हे के वो मोदी सरकार से गौ आतंकी हमलो के ऊपर एक सख्त कानून को लाने के लिए बाध्य कर सके. क्या इन पत्रकारों में इतनी हिम्मत हे के वो मोदी सरकार को बाध्य कर सके की जितनी भी महिलाए गौ आतंकिओ के हमलो में बेवा हो गई हे उनके भरण पोषण के लिए सरकार एक वज़ीफ़ा मुक़्क़र्र कर दे और कम से कम फेमिली के एक मेंबर को सरकारी नौकरी दे क्या इन भगवा पत्रकारों में इतनी हिम्मत हे के वो मोदी सरकार की गौ रक्षा की दोगली निति पे आलोचना कर सके. गोवा के मुख्य मंत्री पब्लिक रैली में कहते हे के गोवा में गौ मॉस की कमी नहीं होने देंगे.  खूब गौ वंश काटो खूब गौ मॉस खाओ. इतना ही नहीं फिर मुख्य मंत्री सदन में बयान देते हे के गोवा में गौमांस पे बंदी लागू नहीं होगी और किसी भी तरह का गौमांस पे प्रतिबंद नहीं होगा, अवैध बूचड़ खानो को वेध किया जाएगा और आगे मंत्री महोदय कहते हे फिर भी अगर गोवा में गौ मॉस की कमी होती हे तो उसकी खपत पड़ोस के राज्यों से की जायगी क्या इन पत्रकारों को कोई भी न्यूज़ अपनी मर्ज़ी से बगैर एडिटर से अप्रूवल लिए पब्लिश या एयर करने की इज़ाज़त हे.  जब ये पत्रकार खुद गुलाम है अभी तक आज़ाद नहीं हुए तो ये पत्रकार किस बिना पे मुस्लिम महिलाओ की आज़ादी का जश्न मनाते  है और दुसरो को बाध्य करते हे के वो भी इनकी इस मुहीम में शामिल हो. इस्लाम ने मुस्लिम महिलाओ को खूब आज़ादी दी हे उनको किसी तरह की कोई कैद नहीं हे.  हां उन महिलाओ के लिए इस्लामिक कानून कैद साबित होंगे जो हिन्दू आतंकिओ और भगवा चोले वालो के इशारो पे काम करती हे और अपनी शरीयत और मर्यादा नहीं समझती. तभी तो नेशनल टी.वि. आज तक पे सभी पराये मर्दो के सामने एक महिला अपने आपको खुद बरहना करती हे असद साहब ये कह के की हमारा हलाला करवाने के लिए बुलवा रहे हो. अब जिस महिला को अपनी इज़्ज़त प्यारी न हो वो क्या इस्लामिक शरीयत की इज़्ज़त करेगी. उसपे आज तक की भगवा महिला पत्रकार व्यग भरी हसी हस्ती हे. तो इससे ये ज़ाहिर होता हे के भगवा मीडिया इन महिलाओ को उकसा रहा था और इन महिलाओ के चरित्र में ही कमी थी जिसकी वजह से इनको इंस्टेंट तीन तलाक हुई.  जिसका इस्लाम पूरा समर्थन करता हे. अगर किसी महिला के चरित्र में खोट हो या कोई मुस्लिम महिला हिन्दू रीत रिवाज़ पालती हो मूर्ती पूजा वगेरा करती हो तो उसको तीन तलाक़ दी जा सकती हे.


इस बात के एक पत्रकार होने के नाते मेरे पास पुख्ता सबूत हे के इन महिलाओ को भगवा तंज़ीमों ने पैसा और दूसरा सपोर्ट दे कर उच्चतम न्यायलय जाने के लिए बाध्य किया. अरे जिस महिला के माता पीता के घर में फाके की नौबत हे और जो महिला पड़ी लिखी भी नहीं हे वो कैसे उच्चतम न्यायलय की बात कर सकती है.  ऐसा करने के पीछे भगवा तंज़ीमों की सिर्फ और सिर्फ इस्लाम और मुसलमानो को बदनाम करने की नियत थी ताके हिन्दू धर्म की कुरीतिया छुपाई जा सके. और मिडिया का ध्यान हिन्दू कुरीतिओ से हट मुस्लिम समाज पे केंद्रित हो जाए.  जो बीजेपी और भगवा कारकून गुजरात में झूट बात पे के रोड का उद्धघाटन हे मंदिर के सामने मुस्लिम महिलाओ का मिठाई खिला के फोटो लेते है और उसको गलत रंग में पेश करते हे के मुस्लिम महिलाओ ने उच्चतम न्यायलय के फैसले का मिठाई बाँट के किया खेर मकदम. तो ये भाड़े के टटटू किसी भी हद तक गिर सकते हे.


दूसरी बात सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दे दिया मतलब शरीयत बदल जायगी ऐसा नहीं हे. जो इस्लामिक कानून है वो अपनी जगह रहेंगे और सुबह क़यामत तक वो वैसे ही रहेंगे. किसी भी कोर्ट के कहने से इस्लामिक कानून नहीं बदल सकते. अगर कल से उच्चतम न्यायलय फैसला दे देगा की एक मुस्लिम तब तक मुसलमान नहीं कहलायेगा जब तक वो हिन्दू धार्मिक किताब गीता और रामायण को भी नहीं पड़ता तो क्या सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हिसाब से वो सही होगा.  नहीं हरगिज़ नहीं..... क़ुरआन में सिर्फ एक मुसलमान होने के लिए ४ किताबो को मानने का ज़िक्र आया हे.  उसमे शामिल हे तौरेत, इंजील, ज़बूर और क़ुरआन. 


मुस्लिम समाज किसी भी कोर्ट के फैसले को अपनी शरीयत के ऊपर मानने के लिए बाध्य नहीं हे. अब अगर सुप्रीम कोर्ट शादी बयाह  या किसी भी समाज के पर्सनल मामलो में दखल अंदाज़ी करने लग गया तो उसको एक मरीज ब्यूरो खोल लेना चाहिए. एक लड़की कह रही हे के में अपने शोहर के साथ रहना चाहती हूँ लेकिन सुप्रीम कोर्ट कह रहा हे नहीं तुम नहीं रह सकती तो लव जिहाद का मामला हे. तो क्या अब सुप्रीम कोर्ट किसी महिला को कब मासिक धर्म आती हे और उसको किसके साथ हम बिस्तर होना चाहिए ये सब बाते भी ते करेगा. इतना तो बेइज़्ज़ती उच्चतम न्यायलय की १९४७ के  बाद से कभी नहीं हुई जो २०१४ के बाद से मोदी राज आने के बाद हो रही हे. और क्यों हो जब एक चाय वाला देश का प्रधान होगा जिसकी खुद की कोई इज़्ज़त नहीं तो वो दूसरी संस्स्थाओं को भी उसी तरह का समझेगा. देश की सर्वच न्यालय का एक डेकोरम होता हे उसकी कही हुई बात को लोग ध्यान देना चाहिए की उसका मज़ाक बनना चाहिए.  हर उस मसले में जहा उच्चतम न्यायालय का कार्य छेत्र हो अगर देश की सर्वच न्यायालय भगवा तंज़ीमो के दबाओ में या सरकार के दबाओ में दखल अंदाज़ी करेगा तो मज़ाक बनना लाज़मी हे.

जुबेर अहमद खान

पत्रकार

Tuesday, 29 August 2017

अब दिखेगा मुंबई में अज़ान का असर:

मुंबई में तूफानी बारिश से सामान्य जन जीवन ठप्प लोकल, बस और दुसरे सभी वाहतूक एक जगह जाम हो गए और मुंबई नगरी को जैसे ब्रेक लग गया हो. महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने खुद स्थिति का जायज़ा लिया और सभी सम्बंदित आला अधिकारिओ को सख्त निर्देश दिए के किसी भी तरह की जन हानि नहीं होनी चाहिए. मुख्य मंत्री ने स्वतः हॉट लाइन पे बी.ऍम.सी. तथा आला पुलिस अधिकारिओ को घायलों को तुरत वेधकिया उपचार के निर्देश दिए और कोई घायल तो नहीं हे इस सबंध में विचार पूस की.


आज शाम असर मगरिब के दरमियान रज़ा एकेडेमी के सरबराह जनाब सईद नूरी अपने मशाएकीन और मुरीदीन के साथ अपने ऑफिस से निकले और मोहम्मद अली रोड पे बारिश में भीगते हुए अज़ान दी. जिससे इस तूफ़ान का असर इंशाल्लाह कल तक कम होगा. क्योकि हर मुसलमान का ये अज़्म हे और पैगम्बर सल्लम की हदीस मुबारक हे के जब तुम अल्लाह का अज़ाब आने का अंदेशा महसूस करो या तूफ़ान की आहट महसूस करो तो अज़ान दिया करो, अज़ान अज़ाब और इंसान के बीच ठाल का काम करती है.


इस तरह के बोहोत से वाक़ेयात मौजूद है तमिलनाडु में सिर्फ अज़ान देने की वजह से भयंकर सूनामी आते आते रुक गया. क्योके मुसलमानो ने अज़ान देना शुरू कर दिया था. २०१४ में इसी तरह से तमिलनाडु के एक तटीय गांव में तूफ़ान की आहट को मुस्लिम समाज ने भाप लिया और अज़ान देना शुरू की और तूफ़ान रुक गया. इस सन्दर्भ में इस पर्त्रकार ने दिनाक //२०१७ को एक लेख भी लिखा हे. And how long you disprove Allaha..


हां ये वही अज़ान हे जिसकी वजह से कुछ लोगो की नींद में खलल पड़ता है. लेकिन ये अज़ान तूफानों का रुख मोड़ देती है और अल्लाह के जलाल को कम करती है. फिर इसी अज़ान से शैतान ४० कोस दूर हो जाता है. बीजेपी के बोहोत से नेता मुस्लिम समाज पे व्यंग करते है के ये लोग १४०० साल पुरानी परम्पराओ को पालते है और मुस्लिम समाज रूडी वादी होता हे. फिर अगर १४०० साल पुरानी रूडी वादी परम्परा आज के २१वी सदी के तूफ़ान का रुख मोड़ सकती है जो साइंस और टेक्नोलॉजी नहीं कर सकती तो १४०० साल वाली रूडी वाड़ी परम्परा काम की है या आज का साइंस और टेक्नोलॉजी.


मुसलमान आज भी अगर सच्चे दिल से अल्लाह की हम्दो सना करे तो उसका दुनयावी ताक़त बाल भी बाक़ा नहीं कर सकती. ये हर सच्चे मुस्लिम का अज़्म हे. ये तो मुस्लिम सामाज थोड़ा सा भटक गया हे नहीं तो दुनिया की कोई भी ताक़त मुसलमानो का बाल भी बांका नहीं कर सकती. सहाबी उमर फ़ारूक़ रज़ि. अल्लाह ने जेरुसलम बगैर खून व् गरत के फतह किया था. सिर्फ इस्लामिक किरदार और टीचिंग की वजह से.


तो इंशाल्लाह कल तक ये तूफ़ान का रुख मोड़ दिया जाएगा.


जुबेर अहमद खान
पत्रकार