Sunday, 21 January 2018

शुरू करना होगी हिन्दू स्टेट के खिलाफ बगावत


अभी पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश में जनता के द्वारा चूने हुए प्रतिनिधि ने एक ऐसा भगवा आदेश दिया है जिसका असर आते समय में समूचे हिन्दू स्टेट पे दिखने की सम्भावना है. हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब जनता के चूने हुए प्रतिनिधि ने ऐसा भगवा आदेश दिया होगा. २०१४ के बाद देश की सबसे बड़ी संसद का चूना हुआ प्रतिनिधि सुब्रमण्यम स्वामी एक टी.वि. इंटरव्यू में कहता है के हम चाहते है मुस्लिम आपस में लड़ के मर जाए और हिन्दू एक हो जाए.  आगे वो कहता है हम मुस्लिम समाज में नाइत्तेफ़ाक़ी को और बढ़ाएंगे.    २०१४ के बाद से ही भारत को हिन्दू स्टेट बनाने की कवायत चालु थी और हिन्दू आतंकवादी संघटन के मुख्या प्रवीण तोगड़िया, बजरंगदल, संघ के मोहन भागवत हिन्दू महासभा के चीफ, युवा वाहिनी के चीफ ये सभी आतंकवादी भारत को २०२४ तक हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की कसमे खा चुके है.   देश की संसद के प्रतिनिधि स्वामी के बाद अब एक और प्रतिनिधि ने ऐसा भगवा आदेश दिया है के २०२४ तक भारत हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दिया जाएगा फिर मुस्लिम समाज को हिन्दू रीती रिवाज़ पाल के रहना पड़ेगा और जिसको नहीं रहना है वो पडोसी देश में शरण ले ले. सदन के गलयारो से हिन्दू राष्ट्र की आवाज़े उठाना और उसपे सरकार की खामोशी मतलब साफ़ है की अब उस आदेश को पूरा करने में सरकार की भी रज़ामंदी है.    अब सवाल ये उठता है क्रिस्टी, सिख, पारसी, दलित ये समाज कहा जाएगा अगर इन्होने हिन्दू स्टेट के आतंकवादीओ के रीति रिवाज़ या भगवा आदेश को नहीं माना तो इनका क्या होगा.


फिर जिस तरह से हिन्दू स्टेट में साम्प्रदाइक ज़हर की खेती खूब पनप रही है और उसका असर अब तो समूचे सिस्टम, प्रशासन, आर्मी तथा न्यायपालिका पे भी दिखने लगा है.  उससे खतरे की घंटी मुस्लिम सामाज के लिए नहीं परन्तु हिन्दू स्टेट के लिए ही है.  फिर जिस तरह से ये हिन्दू आतंकवादी फिज़ाओ और हवाओ को भी साम्प्रदाइक बना रहे है और हिन्दू मुस्लिम में बाट रहे है तो उससे नुकसान हिन्दू स्टेट का ही है.  जिसकी सबसे बड़ी मिसाल जो बॉलीवुड, खिलाड़िओ और सांस्कृतिक मंचो का साम्प्रदाइक होना है. जो २०१३ से पहले कभी भी साम्प्रदाइक नहीं दिखे और कभी भी ऐसी बयानबाज़ी या कोई भी ऐसा कार्य नहीं किया जिससे देश की एकता और अखंडता को ठेस पहुंचे.  परन्तु हाल ही में बोहोत से ऐसे बेहूदा बयान बाज़ी सामने आई जिसकी बुनियाद सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम समाज से नफरत थी.  और सीधा इस्लाम पे हमला और मुस्लिम समाज की दिल आज़ारी.  चाहे वो बॉलिवुड में से किसी ने भी ट्रिपल तलाक़, हलाला, अज़ान या बकरी ईद पे जानवर की कुर्बानी पे दिया हुआ बेहूदा भद्दा बयान हो या फिर हज सब्सिडी से जुड़ा हुआ बयान हो इन सभी बयानों से एक बात साफ़ है के २०१४ के बाद किसी  विशेष समुदाय के खिलाफ बॉलीवुड या जनता के दिल दिमाग में ज़हर भरा गया था, ये कह के अब हम सत्ता पे है जो कहना है कह डालो जो करना है कर डालो हम तुम्हारे साथ है.  जो लोग अज़ान पे कटाक्ष करते है परन्तु दुबई में जा के कंसर्ट करते है और दुबई के शेखो के जूते मौजड़िया तक उठाने में अपनी इज़्ज़त अफ़ज़ाई समझते है. फिर उनको वहां अज़ान से तकलीफ नहीं होती. अगर इतने बड़े हिन्दू स्टेट के भक्त थे तो मना करना था एक मुस्लिम देश में कंसर्ट करने से. इस पत्रकार के पास संघ का खुल्ला ऑफर आया था तुम बीजेपी, संघ या उससे जुड़े हुए किसी भी संघटन के खिलफ मत लिखा करो में आपसे मिलना चाहता हूँ और आपको जो कुछ चाहिए दे दूँगा. आपको रूपयो में तौल दूँगाजिसका जिक्र लेखक अपने १३ अगस्त २०१७ को लिखे एक लेख Started troubling again……… में भी कर चूका है लेकिन इस पत्रकार ने माना कर दिया.. फिर जिसको अज़ान से तकलीफ थी उसने यूं टर्न कहे को लिया
 

एक आतंकवादी को सत्कार करने बॉलीवुड का सबसे वरिष्ठ नागरिक अमिताभ बच्चन अपनी बहू और बेटे के साथ उस आतंकी प्रवर्ति के साथ सेल्फी लेता है.  अगर ये ही कार्य अक्षय कुमार या अभिजीत जैसे आतंकवादी प्रवर्ति ने किया होता तो इंसानी हुकूक पे यकीन रखने वाले किसी भी मनुष्य को ठेस नहीं पहुँचती लेकिन ऐसी घिनौनी हरकत किसी और ने नहीं बल्कि उस इंसान ने की हे जो कभी नेहरू परिवार का एक ख़ास सदस्य हुआ करता था और इलाहाबाद से कांग्रेस के टिकट पे लोक सभा तक पहुंच गया था.  फिर अगर उस इंसान के मन में २०१४ के बाद इतना ज़हर भर गया के वो अपनी गंगा जमुनी तहज़ीब तक भूल कर हिन्दू स्टेट के आतंकिओ को लुभाने के लिए ऐसा काम कर बैठा जिसका परिणाम आने वाले सालो में भयावह होगा.


अब अगर हिन्दू जनता के मन में पूरी तरह से ज़हर भर चूका है और हिन्दू स्टेट का हर नागरिक वो काम करता है जिससे मुस्लिम समाज की दिल आज़ारी होती है तो समूचे मुस्लिम समाज को भी खुल के पाकिस्तान को सपोर्ट करना चाहिए और अगर हिन्दू स्टेट बनाम पाकिस्तान युद्ध होता है तो समूचे मुस्लिम समाज को पाक का साथ देना चाहिए.  क्योके ये युद्ध पाकिस्तान बनाम भारत नहीं होगा बल्कि मुस्लिम बनाम हिन्दू होगा.  या हक़ बनाम बातिन होगा. फिर ये मुस्लिम समाज को ही सोचना है के उनको हक़ का साथ देना है या बातिन का.


जैसा के पहले ही हिन्दू आतंकवादीओ ने सब कुछ तय कर लिया है के भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना है और उसके बाद मुस्लिम समाज को हिन्दू रीति रिवाज के साथ रहना होगा नहीं तो पड़ोस में शरण ले ले. उस हिसाब से अगर कोई भी मुसलमान हिन्दू स्टेट का साथ देता और सोचता है के वो भारत का वफादार है और भारत के साथ गद्दारी नहीं कर सकता तो ऐसे मुसलमान भी हिन्दू राष्ट्र में हिन्दू बना लिए जायेगे.  अगर युद्ध की स्तिथि बनती है तो अब खुल के मुसलमानो को बजाये हिन्दू स्टेट कायम करने के एक मुस्लिम देश का साथ देना चाहिए. 


हिन्दू आतंकवादीओ को ना भारत के तरंगे से और भारत के सविधान से कुछ लेना देना है.  महाराष्ट्र के लातूर में हिन्दू स्टेट के आतंकिओ के कब्ज़े के बाद २० फरवरी २०१६ को एक पुलिस अफसर को ज़बरदस्ती भगवा झंडा हाथ में ले कर बेइज़्ज़त किया गया और लातूर चौक से तिरंगा उतार के भगवा झंडा उस पुलिस अफसर के हाथो ज़ररदास्ती फेहरा दिया गया.  फिर अभी हाल ही में हिन्दू स्टेट के दुसरे भाग राजिस्थान में एक ऐसा ही मामला सामने आया जहा न्यायलय के ऊपर हिन्दू आतंकवादीओ ने कब्ज़ा कर न्यायधीशों को सुबह से ले कर शाम तक बंधक बनाया और कोर्ट परिसर से तिरंगा उतार फेकना फिर भगवा झंडा फेहराया .  इस बात को साबित करने के लिए काफी है के अभी तो भारत के ऊपर हिन्दू राष्ट्र की सरकारी मोहोर भी नहीं लगी है और ये हालत है फिर जब सरकारी मोहोर लग गई तो हालत बोहोत ही अलग होंगे.

तो अब मुस्लिम समाज को खुद ही सोचना है क्या वो हिन्दू राष्ट्र का हिस्सा बनाना चाहेंगे जहाँ लंगूर पत्रकारों की टीम इस्लाम और मुसलमानो को ज़लील करते रहते हो जहाँ बॉलीवुड सबसे ज़्यादा सेक्युलर समझी जाने वाली इंडस्ट्री में साम्प्रदाइक ज़हर घोल दिया गया हो. जहाँ न्यायपालिका भगवा रंगा चुकी हो और न्याय जो के एक नागरिक का प्रथम हक़ है उसकी ही हत्या हो रही हो.  जहाँ सरकार तुम्हारी शरीयत के साथ हर दुसरे रोज़ खिलवाड़ कर रही हो. जहाँ आर्मी, पुलिस की गोली सिर्फ मुसलमान नाम देख ही चलती हो.   जहाँ आतंकवादी तुम्हारी बहिन बेटिओ की इज़्ज़त तुम्हारे सामने ही उतार रहे हो और उसका वीडियो सोशल मीडिया पे वायरल कर रहे हो  

या  

उस देश का साथ देना है जो कम से कम तुम्हारे मुस्लिम भाईओ का है और भाई कितना ही दुश्मन क्यों हो जाए जब बूरा वक्त आता है तो उसको भी उतना ही दर्द होता है जितना के उस बुरे वक्त का तुमको.   और वो आपके साथ हर बुरास भूला के साथ आ जाता है.   अब फैसला है आपका


जुबेर अहमद खान
पत्रकार
 


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Will have to start revolution.
autonomousjournalist.wordpress.com/2018/01/21/wil


शुरू करना होगी हिन्दू स्टेट के खिलाफ बगावत

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