Tuesday, 13 November 2018

अंततः हिटलर को शह और मात .....

इस पत्रकार का विश्लेषण शायद ही कभी गलत होता है। यह पत्रकार ज्वलंत मुद्दों पर अपने लेखों के माध्यम से समय समय पर विश्लेषण देता है जो ९८ से ९९% सटीक साबित होते है। जाकिर नाइक पर कई लेख इस पत्रकार ने कलमबंद किये और मोदी सरकार के लिए सम्मान की हानि, ज़लालत, रूसवाई की भविष्यवाणी की थी और जाकिर भाई के संबंध में इज़्ज़त, सम्मान की; जब की समूचे भारतीय लंगूरप्रशासन, संघी आतंकवादियों, हार्डलाइनर हिंदुओं द्वारा उनको शारीरिक दंड और गिरफ्तारी का समर्थन और मांग कर रहे थेलेकिन इस पत्रकार ने उनके लिए सम्मान और इज़्ज़त की भविष्यवाणी की थी। सबसे पहले इंटरपोल ने श्री नाइक को क्लीन चिट दी और आखिरकार भारतीय न्यायपालिका ने श्री नाइक को गलत तरीके से वारंट भेजने के लिए हिटलर की एजेंसियों एन.आई.., ईडी को डांटा और मुंबई में उनकी कई करोड़ रुपए की व्यावसायिक संपत्ति की जप्ती तथा मद्रास में आईआरएफ स्कूल के बंद करने पे रोक लगा दी और तुरत इन ज़प्त की हुई सम्पतियों को वापिस करने को कहा और कहा इनको ज़प्त करने के लिए उचित कानून की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।

मध्यस्थ ने भारत सरकार से पूरी संपत्ति को तुरंत बिना किसी देरी के वापिस करने के लिए कहा। आगे अदालत ने कहा कि उन्हें जाकिर में कुछ भी दुर्भावनापूर्ण नहीं दिखा और ना ही आतंकवादी गतिविधियों में उनकी भागीदारी, या वो ढाका में विस्फोट में किसी भी तरह शामिल थे। माननीय मध्यस्थ कहते हैं कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उनके सभी व्याख्यानों और भाषणों को सूना है, भाषणों में उन्हें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला, वास्तव में वह आध्यात्मिक व्यक्तित्व है और शांति, सद्भाव और समृद्धि के बारे में बात करतें हैं। भारत में चुनावी माहोल में अदालत द्वारा इस तरह का फैसला निश्चित रूप से चड्डीधारी और लंगूरों को कड़वा स्वाद देगा।

२०१९ में इस तरह के फैसले निश्चित रूप से मोदी सरकार को सबसे खराब परिदृश्य में रखेंगे और उसके नारे सबका साथ, सबका विकास पर कई सवाल उठाते हैं। मुसलमानों के लिए उनकी छद्म धर्मनिरपेक्ष मानसिकता और सहानुभूति भी ऐसे फैसले के बाद बेनक़ाब हो जाती है कि उसने मुसलमानों के साथ किस तरह से दोहरा मानक खेल खेला था। एक तरफ वह ट्रिपल तालाक पर मुस्लिम महिलाओं के साथ सहानुभूति दिखाता है, दूसरी ओर वह मुस्लिम विद्वानों और मौलानाओं के पीठ में खंजर घोंपता है क्योंकि वे इस्लाम का सही तरीके से प्रतिनिधित्व करते हैं और महिलाओं, लड़कियों और मुस्लिमों को मोदी जैसे नकली  झूठे फरेबी मौलानाओं के जाल में फसने से रोकते हैं। और ये ही मौलाना सही इस्लाम बताते है।

वास्तव में जाकिर और इस्लाम के अन्य पंथों के मौलाना उनके भाषण, काम इस्लाम की सच्ची भावना पर आधारित हैं जो शांति और मानवता का संदेश देता है। इस तरह के चरम ईश्वरीय व्यक्तित्व शैतान की गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं, इसलिए मोदी और हिटलर मानसिकता जैसे व्यक्ति हमेशा उन्हें परेशान करने के लिए पीछे रहते हैं।

इतिहास खुद को दोहराता है, प्राचीन भारत में वली कमिल सूफी ख्वाजा मोइनुद्दीन चिस्ती रेहमतुल्लाह अलैहे एक समर्पित आध्यात्मिक असली फ़कीर ने उस समय के तथाकथित मजबूत शक्तिशाली राजा पृथ्वीराज चौहान को उखाड़ फेंका था। गारीब नवाज ने राजा के हर शर को, अगड़म तगडाम को पस्त किया और वह सूफी संत के सामने अपनी जादूई और शैतानी ताक़त के ज़ोर के बावजूद भी जीतने में असफल रहा। २१ वीं शताब्दी में वही बात स्पष्ट है, भारत के सबसे कड़क और शक्तिशाली राजा ने फिर से सच्चे दिव्य व्यक्तित्व से हार का सामना करना पड़ा, और वह खेल में चारों खाने चित हो गया।

जिस तरह से मोदी और उसकी शरपसनद तंज़ीमों को हर छेत्र में ज़लालत और रूसवाई मिल रही है जल्द ही कश्मीर उनके हाथ से जाएगाकश्मीर भारत का अभिन्न अंग ना रहेगाक्योंकि जिस तरह का ज़ुल्म और तशद्दुत भारतीय आतंक फ़ोर्स बेगुनाह कश्मीरी अवाम के ऊपर कर रहे है सर्वशक्तिमान का फैसला तो मज़लूमों के हक़ में ही होगादूसरा ज़बरदस्त झटका मोदी सरकार को भारत के एक और विभाजन के रूप में लगेगामोदी सरकार इतिहास के पन्नो में भारत से कश्मीर और नखलिस्तान के विभाजन के लिए जानी जायेगी.

English version     

Finally, checkmate to Hitlar…..

अंततः हिटलर को शह और मात .....

इस पत्रकार का विश्लेषण शायद ही कभी गलत होता है। यह पत्रकार ज्वलंत मुद्दों पर अपने लेखों के माध्यम से समय समय पर विश्...