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Mr. Zuber Ahmed Khan is a Muslim by birth, has got strong and stiff views on Islam. Mr. Zuber believes in Humanity when Islam is in trouble. He believes any Muslim Men or Women should die for Islam when required. Mr. Zuber Ahmed Khan completed his Post Graduate in Public Administration in the year 1995 and stands in first class. He completed his Diploma in Computer Hardware and Software Engineering from Bombay. Completed Masters Degree in Journalism & Mass Communication and stand in first Class.

Sunday, 10 December 2017

आतंकवादी के समर्थन में अकेले खड़ा रह गया


हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प का इजरायल की राजधानी के रूप में यरूशलेम को मान्यता देना का निर्णय और तेलअवीव से जेरूसलम को अमेरिकी दूतावास को स्थानांतरित करने का निर्णय उनके मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है। यह निर्णय फिलिस्तीन नागरिकों को अपने ही घर में पागल शरणार्थी करने जैसा है, जो इसराइल के आतंक, गोलियां, रक्तपात, और उस आतंकी देश के चंगुल से फिलिस्तीन की मुक्ति की प्रक्रिया को कम करता है।  यहाँ तक अमेरिकी राष्ट्रपति के इस एक तरफा निर्णय को ग्लोबल कम्युनिटी द्वारा मुख्य रूप से रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस तथा इस्लामी देशो ने सम्मान और मान्यता नहीं दिया, और खुले तौर पर फिलिस्तीन के समर्थन में खड़े दिखे। भारत जो २०१४ के बाद से हिन्दू आतंकवाद का नया पनाह गहा बन गया है, और यहूद आतंकी इजरायल की प्रमुख सहयोगी रूप में देखा जाता है, नपा तुला बयान दिया जिससे आतंकिओ को कोई ठेस न पहुंचे और विश्व में उसकी साख कायम रहे. भारत खुल के फलस्तीन के समर्थ में नहीं दिखा उसने कहा कि फिलिस्तीन पर इसकी स्थिति स्वतंत्र है और किसी तीसरे देश द्वारा निर्धारित नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने में कहा:-


"India's position on Palestine is independent and consistent. It is shaped by our views and interests, and not determined by any third country," said Ministry of External Affairs spokesperson Raveesh Kumar.  



इजरायल-फिलिस्तीन के मुद्दे पर विश्व समुदाय द्वारा अमेरिका को अलग थलग करना और और यूं.एन. में अपमानित होना श्री ट्रम्प की राजनीतिक क्षमता की कमी को साबित कर करता है, जिस एक तरफ़ा निर्णय ने अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपमानित किया। लेखक का मानना ​​है कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिकी कांग्रेस को आत्मविश्वास में लिए बिना अकेले निर्णय लिया होगा।

 

सुरक्षा परिषद के १५ सदस्यों में से ८ सदस्यों और दो स्थायी सदस्य ब्रिटेन और फ्रांस सहित गैर-स्थायी सदस्यों बोलीविया, मिस्र, इटली, सेनेगल, स्वीडन, ब्रिटेन और उरुग्वे ने, इस मुद्दे को हल करने के लिए शुक्रवार को एक विशेष, तत्काल और आपात बैठक की मांग की थी।  

 

संयुक्त राष्ट्र ने यरूशलेम को इजरायल की राजधानी की यू.एस. मान्यता को खारिज कर दिया। यूरोपीय संघ और अन्य सदस्यों ने बैठक में भाग लिया यूरोपीय संघ ने कहा उसकी फिलिस्तीन-इजरायल मुद्दे पर एक स्पष्ट और संयुक्त स्थिति है। ई.यू. ने संयुक्त राष्ट्र में अपने बयान में कहा "हम मानते हैं कि इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष का एकमात्र यथार्थवादी समाधान दो राज्यों पर आधारित है, और यरूशलेम दोनों इजरायल राज्य और फिलिस्तीन राज्य की राजधानी है, जहां तक ​​कि ऐसा होता है, यूरोपीय संघ ने यरूशलेम पर किसी भी संप्रभुता को नहीं पहचाना है"

 


सुरक्षा परिषद में यूनाइटेड स्टेट्स शुक्रवार को यरूशलेम को इज़राइल की राजधानी तस्लीम करने के मुद्दे पे अकेला खड़ा दिखा। एक के बाद दूसरा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हर सदस्यों ने यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने के अमेरिकी फैसले की आलोचना की। निक्की हेली संयुक्त राज्य अमेरिका की सुरक्षा परिषद में राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र में सदस्यों के गुस्से को शांत करने की कोशिश की, और कहा अमेरिका शांति बनाए रखने के लिए और अधिक प्रतिबद्ध हे और हम इज़राइल और फिलिस्तीन के बीच अग्रिम शांति के लिए काम कर रहे हैं। हेलि ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन एक नई शांति योजना पर काम कर रहा है, लेकिन उसने इसके लिए कोई रोड मैप या योजना नहीं दी है।