Sunday, 16 September 2018

हिन्दू तांत्रिक काला जादूगर आशु महाराज से आसिफ खान तक की कहानी।

नई दिल्ली 

पिछले सप्ताह एक और पाखंडी तांत्रिक काला जादू कर के समोहन करने वाले एक सयम्भू संत आशु महाराज को उसके आश्रम से पुलिस ने एक महिला की अर्ज़ी पे अरेस्ट किया है। तथा कथित हिन्दू तांत्रिक आशू महाराज ने पहले उक्त महिला को अपने प्रेम जाल में फसा के उसके साथ कई महीनो तक हवस पूरी की फिर जब उसका दिल एक ही महिला से भर गया और उस तांत्रिक को उक्त महिला में आनन्द की कमी दिखने लगी तो उसकी शैतानी निगाहें महिला की ना बालिग बेटी के ऊपर पड़ी और उसने उसको भी अपनी हवस का शिकार बनाया।

इस तांत्रिक आशु महाराज की भी अजीब कहानी है; ऑटोनोमस जौर्नालिस्ट के सवालदाता ने अपनी टीम के साथ फेक्ट फाइंडिंग की तो उसके होश उड़ गए जिस आशु महाराज को मीडिया का एक धड़ा फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पे आसिफ खान बता रहा है और उसका मज़हब इस्लाम वह कभी पंक्चर बनाने का काम करता था।  इसके बाद उसने अपना नाम मुस्लिम समाज को गुमराह करने की नियत से और मुस्लिम महिलाओं के साथ योन संबंध स्थापित करने की नियत से आसिफ रख लिया   ऐसा करने के पीछे उसकी हिंदुत्वादी संघटनो ने मदद की और उसका फ़र्ज़ी आधार तथा दुसरे दस्तावेज़ मुस्लिम नाम से बनवा डाले ताके ये आशु महाराज मुस्लिम महिलाओं को अपने जाल में फसा सके  लेकिन जब उसको इस कार्य में कुछ यश नहीं मिला क्योंकि मुस्लिम महिलाये ना के बराबर ज्योतिष विद्या और तंत्र मन्त्र पे यकीन करती थी  और जो करती थी वो उसको मू मांगी रक़म नहीं दे पाती थी।  उसने हिन्दू धर्म में ज्योतिष, तंत्र मन्त्र और काली विद्या के नाम पे महिलाओ और जनता को फ़साने का प्लान बनाया।  जिसमे उसको ना सिर्फ यश मिला बल्कि पैसा और अपनी वासना की भोग को पूरा करने के भी भरपूर अवसर मिले। 

उन दिनों हिन्दू संतो के ऊपर बलात्कार के कई केस हुए और हिन्दू संतों की गलीज़ हरकतों की वजह से हिन्दू धर्म की बोहोत बदनामी हुई  फिर इस तांत्रिक आशु महाराज को हिन्दुत्वादी संघटनो ने सलाह दी के तुम हिन्दू धार्मिक संत के रूप में अपना काम काज शुरू करो  तंत्र मन्त्र और ज्योतिषी विद्या के तहत तुमको यश, पैसा और सब कुछ मिलेगा और अगर पकड़ा गए तो तुम्हारे पास मुस्लिम दस्तावेज़ है बदनामी तुम्हारी थोड़ी होनी है एक मुस्लिम संत की होगी  ऐसा करने के पीछे की भी शैतानी हिन्दुत्वादी संघटनो की थी क्योंकि हिन्दू संत, मंदिर, आश्रम बोहोत बदनाम हो चुके थे सो अब वो लोग मुस्लिम संतों को बदनाम करना चाहते थे फिर एक मुस्लिम हिन्दू धर्म के नाम पे पाखंड फैला रहा था ये बोल के साम्प्रदाइक फसाद करने की फिराक में थे।  हिन्दुत्वादी संघटनो की एक तीर से दो निशाने योजना है।

दिल्ली के होस ख़ास के क्राइम ब्रांच के पुलिस अफसर ने बताया  कि आसिफ उर्फ आशु महाराज के दस्तावेजों की जांच की गई तो पता लगा कि उसने आधार, पासपोर्ट और वोटर कार्ड आदि तमाम कागजात आसिफ खान के नाम से ही बनवा रखे हैं, लेकिन धर्मगुरु वो हिन्दू ही था।  वो नाम बदलकर आशु बन गया और लोगों का भविष्य बताने का काम करने लगा। जिससे उस आशु महाराज का दूर दूर तक कोई भी समभंद नहीं है.  आशु महाराज दिल्ली की पॉश कॉलोनी हौजखास में आश्रम बनाकर लोगों की आंखों में धूल झोंक रहा था। वह हाथ देखने के एवज में २५,००० रुपये फीस लेता था। इतना ही नहीं वह अपने क्लाइंटों से दिल्ली के फाइव स्टार होटलों में मुलाकात करता था।

तांत्रिक आशु की पूरी कहानी फिल्मी ओर प्रायोजित है जिस तरह से लंगूरों ने बीजेपी के आते ही हिन्दुत्वादी संघटनो के इशारे पे अगस्त २०१४ में रांची के एक हिन्दू रणजीत सिंह कोहली को रकीबुल हसन बना डाला था ओर घरेलू विवाद को लॉव जिहाद का नाम दे दिया था.  उस मुद्दे पे इस पत्रकार ने अपने अंग्रेजी लेख Hindu Love Jihad. तथा Hindu Media biased Media. में वर्णित किया है.
  
आशु महाराज के मुस्लिम होने की झूटी खबर की तरह हर दूसरे रौज़ रणजीत सिंह कोहली के रकीबुल हसन होने की इसी तरह के फेक समाचारों से समूचा लंगूर मीडिया भरा पड़ा था. फिर इस तरह के बे बूनियाद ओर मन घडन्त खबरो पे विराम तब लगा जब इस पत्रकार ने खास ज़ी न्यूज़ ओर आज तक के खिलाफ मुम्बई उच्च न्यायल्य मे पेटिशन दायर की ओर समूची जानकारी पुलिस को पेश करने को कहा. उक्त पेटिशन पे उच्च न्यायल्य के समक्ष पुलिस एसा एक भी साक्ष या पूरवा नही दे पाई जिससे ए साबित हो सके की रणजीत ने अपना धर्म बद्ल कर इस्लाम कर लिया था ओर नाम रकीबुल हसन रख लिया था. फिर न्यायल्य ने लंगूरो को ज़ौरदार फटकार पिलाई. इस पत्रकार ने ये ही प्रार्थना की थी की खोटी जानकारी के आधार पे एक समाज के खिलाफ दुष्टप्रचार किया जा रहा है ओर उस समाज के सम्मान की सामूहिक हानि हो रही है जिसके लिये हेवी डेमेज लंगूरो के उपर लगा कर मुस्लिम समाज को दिया जाये. फिर कहीं जा के रणजीत का किस्सा बंद हूआ ओर दूसरे ही रौज़ से वो खबर मर गई.  रणजीत के फ़र्ज़ी और झूठे मामले पे वी.ह.पी. और बजरंगदल ने रांची में खूब उत्पात और आतंक मचाया था तथा २ दिनों तक झारखंड बंद रखा और मुस्लिम समाज के युवको के साथ ज़बरदस्त मार पीट की गई तथा मुस्लिम महिलाओं को सरे आम प्रताड़ित कर के ज़लील किया गया.

पुलिस और दिल्ली प्रशासन को सतर्क रहने की ज़रुरत है जिस तरह से आम तोर पे हिन्दू आतंकी झूट और फरेब के सहारे दंगा फसाद करते है उसी तरह इस आशु महाराज के मुद्दे पे दंगा करने की योजना है.  मीडिया के एक धड़े को इस तरह की ख़बरों को लगातार गर्म रखने के लिए पैसे दिए जाते है ताके हिन्दू उत्तेजित हो कर दंगा फसाद कर डाले.  जिस तरह २०१४ में हिन्दुत्वादी संघटनो के इशारो पे रणजीत सिंह कोहली को लंगूर मीडिया ने रकीबुल हसन बना दिया था और तब तक ख़बरों को गर्म रखा था जब तक रांची और झारखंड में दंगा नहीं हो गया और कई मुस्लिम युवाओ को ज़ख़्मी नहीं कर दिया गया और मुस्लिम महिलाओ को सरे बाजार ज़लील नहीं कर दिया गया.

Sunday, 9 September 2018

२०१९ में ए.आई.एम.आई.एम. बन सकती है किंग मेकर.


जैसे जैसे २०१९ नज़दीक रहा है राजनैतिक पार्टिओं और राजनेताओं के दिलों की धड़कन तेज़ होना शुरू हो गई हैसभी राजनैतिक दल अपने अपने वोट बैंक को  मज़बूत करने में लगे हैबीजेपी अपनी आदत के अनुसार कट्टरपन्ति हिन्दू वोट बैंक के ऊपर निर्भर कर रही है और उसका चुनावी मुद्दे भी २०१२ से लेकर २०१४ तक विकास, सबका साथ सबका विकास जैसे नहीं बल्कि जाती वाद, राम मंदिर और गौ हत्या जैसे मरे हुए विषयों पे आधारित होंगे. परन्तु देखने वाली बात ये है अब जनता इन मरे हुए मुद्दों पे कितना बीजेपी का साथ देती है.     

इन सब से हट के असदुद्दीन और उनकी पार्टी की छवि पिछले कुछ सालों में धीरे धीरे मज़बूत होती जा रही है.  हो सकता है २०१९ में .आई.एम.आई.एम. कुछ ऐसा कर जाए जिसकी के किसी को उम्मीद भी ना हो.  क्योंकि जिस तरह से असदुद्दीन की लोकप्रियता ना सिर्फ मुस्लिम समाज में बढ़ रही है परन्तु दलित, क्रिस्चियन और अब तो कुछ दबे हुए शब्दों में हिन्दू समाज भी उनकी प्रशंसा करने लगा है उससे साफ़ ज़ाहिर हो रहा है के २०१९ में .आई.एम.आई.एम. के लिए समीकरण कुछ अलग होते दिख रहे है.  जहाँ तक संघ, और कट्टरपंथी हिन्दूओं द्वारा जो असदुद्दीन के खिलाफ झूट और फरेब फैलाया जाता है साधारण जनता भी उसको समझ चुकी है के वो सदा ही सविधान और कानून की पैरवी करते है.  हाल ही दिल्ली उच्च न्यायलय में जो याचिका दायर की गई है वो इस बात का भी सबूत है के बीजेपी और कट्टरपंथी असदुद्दीन और उनकी पार्टी .आई.एम.आई.एम. से इतने खौफ ज़दा हो गए के उनको झूट के आधार पे न्यायलय की शरण लेनी पड़ी. 

यहाँ पे ये पत्रकार कहने में ज़रा भी गुरेज़ नहीं करेगा ना सिर्फ बड़े मियाँ बल्कि छोटे मियां की भी लोकप्रियता बड़ी है ना की कम हुई है.  उनके एक बयान के ऊपर संघ तथा कट्टरवादिओं ने खूब हूँ हल्ला किया,  लंगूरों ने उस बयान को खूब हवा दी  जिसका विपरीत परिणाम हुआ. अकबर की लेकप्रियता को ग्रहण लगने के बजाये और बढ़ती हुई दिख रही है.  वही वरुण ने भी ऐसा ही साम्प्रदाइक बयान दिया था जिसको मुस्लिम समाज ने दिल पे ना लिया और लंगूरों ने भी उसको हवा नहीं दी जिसकी वजह से आज वही वरुण रोलिंग बोल बन गए और अपनी पार्टी को छोड़ के कांग्रेस के राहुल गाँधी की तारीफ करते हुए दिख जाते है, क्योंकि अगर बीजेपी से हकालपट्टी होती है तो दूसरा दरवाज़ा खुला होना चाहिए.

एक बात तो साफ़ हो चुकी है २०१९ में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने वाला है. और छोटी पार्टिया गेम चेंजर साबित होंगी.  जिसमे .आई.एम.आई.एम. की भूमिका को ये पत्रकार बोहोत ही महत्वपूर्ण मान रहा है. जिस हिसाब से .आई.एम.आई.एम. की लोकप्रियता धीरे धीरे मुस्लिम समाज से हट के अब दीगर समाज में भी बढ़ रही है वो निश्चित है कट्टरपंथी और छद्दम सेक्युलर पार्टिओं के लिए चिंता का विषय होगी.  

आज सत्ता धारी बीजेपी की हालत देख के २०१९ की तय्यारी पे हिंदी में मशहूर दो कहावतें याद गई पहली  जो भोंकते है वो काटते नहीं”. बीजेपी नामक कुत्ते और बूल डॉग ने २०१३ से लेकर २०१४ तक इतना भौंक दिया के अब जनता २०१९ में उन दोनों के भोंकने के ऊपर ना तो यकीन करेगी और ना ही डरेगी.  २०१४ के बाद जनता को उम्मीद थी के कही से तो कोई चोर को ये कुत्ते काटेंगे और हमसे जो वादे इन कुत्तों को लाने के पहले किये थे के ये बोहोत ही वफादार कुत्ते है एक बार चौकीदारी के लिए मुख्य द्वार पे बिठा दो तो ना होगी चोरी और ना बचेगा चोर.  लेकिन जनता अब समझ चुकी है के असल में ये कुत्ते उन चोरो के ही पालतू थे जो चोरी करते थे तो उनपे कैसे भोकते और काटते, उनको तो अपने मालिक के साथ वफादारी दिखानी थी.

और दूसरी कहावत  धोबी का गधा घर का रहा और घाट का”.  बीजेपी जिस तरह से अपने समूचे किये हुए वादों को पूरा करने में असक्षम रही जिसकी वजह से एक बड़ा तपका उससे झिटक गया. हिंदुत्व, गौ हत्या, राम मंदिर के नाम पे पाखंड किया, सुवर्ण हिन्दू बीजेपी से छिटक गए दूसरा जिसमे शामिल है युवा वर्ग और विद्यार्थी.  बीजेपी ने जिस तरह से समूचे देश की बड़ी यूनिवर्सिटीज में ज़हर की खेती करना चाहि थी उससे एक साधारण युवा जिसको राजनीति से कोई मतलब नहीं बोहोत ही ठगा सा महसूस कर रहा है.  जिसने बीजपी और मोदी को विकास और रोज़गार के नाम पे पिछली बार वोट दिया था, लेकिन उनको क्या पता था के मोदी के आने के बाद .बी.वी.पी. के आतंकवादी यूनिवर्सिटीज को विद्यापीठ में तब्दील करने के लिए युवा वर्ग से उनका हक़ भी छीनने की कोशिश करेंगे.

साधारण जनता  का एक बड़ा वोट बैंक भी बीजेपी से छिटकता दिख रहा है, जिन्होंने बीजेपी  को राम,  हिंदुत्व, गौ माता के नाम पे वोट दिया था. लेकिन बीजपी के आने के बाद गौ की जो दुर्गति हुई है वो किसी से छुपी हुई नहीं है खुद बीजपी के मंत्री संत्री गौ हत्या और गौ मॉस के निर्यात में लिप्त पाए गए. फिर गौ के नाम पे जो लीचिंग और नरसंहार किया उससे साधारण हिन्दू बोहोत ही आघात है. उनको गौ की सुरक्षा चाहिए थी ना की उसके ऊपर राजनीति और मानव हत्या. अब बचा बीजेपी के पास सिर्फ कट्टरपन्ति वोट बैंक या आतंकी ज़ेहनियत.  जो इतने सक्षम नहीं है के बीजेपी को २०१९ में सम्पूर्ण बहुमत दिलवा सके.

बीजेपी के सामने बड़ी समस्या २०१९ में यही होगी साधारण जनता से किस नाम पे वोट मांगे और हिन्दू जनता से किस आधार पे. क्योंकि ना तो बीजेपी ने हिंदुत्व का कुछ भला किया और ना ही साधारण जनता के लिए दाम में कुछ कमी की.  अब तो बीजेपी के पास उसका अपना पारम्परिक वोट बैंक ही बचा है वो भी भ्रम की स्थिति में है के २०१९ में किसको वोट किया जाए. 

हिन्दू तांत्रिक काला जादूगर आशु महाराज से आसिफ खान तक की कहानी।

नई दिल्ली   पिछले सप्ताह एक और पाखंडी तांत्रिक काला जादू कर के समोहन करने वाले एक सयम्भू संत आशु महाराज को उसके आश्रम से पुलिस ने एक ...